(A) $1$. आर.एच. व्हिटेकर द्वारा प्रस्तावित "पाँच जगत वर्गीकरण" के अनुसार, सभी प्रोकैरियोटिक जीवों को मोनेरा जगत के अंतर्गत रखा गया है。
$2$. साइनोबैक्टीरिया और परपोषी बैक्टीरिया दोनों प्रकृति में प्रोकैरियोटिक हैं, जिसका अर्थ है कि उनमें झिल्ली-बद्ध केंद्रक और अन्य झिल्ली-बद्ध कोशिकांगों का अभाव होता है。
$3$. यह वर्गीकरण उचित है क्योंकि जीवों को मोनेरा जगत में रखने का प्राथमिक मानदंड उनका प्रोकैरियोटिक कोशिकीय संगठन है。
$4$. साइनोबैक्टीरिया (नील-हरित शैवाल) प्रकाश संश्लेषी स्वपोषी होते हैं जिनमें क्लोरोफिल-$a$ होता है, जबकि परपोषी बैक्टीरिया कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करते हैं। पोषण के तरीके में इस अंतर के बावजूद, उनकी मौलिक कोशिकीय संरचना (प्रोकैरियोटिक) समान रहती है, जो यूबैक्टीरिया की मुख्य विशेषता है।